कौन अमूर्त विचार करता है?
जार्ज विलहेम फ्रेड्रिक हेगेल, 1808
Keywords:
हिंदी में हेगेल, अमूर्त विचार, जर्मन भाववाद, पाश्चात्य दर्शन, द्वंद्ववादAbstract
यह लेख जर्मन दार्शनिक हेगेल के निबंध का पहला हिंदी अनुवाद है। एक आरंभिक प्रयास के रूप में, इसका उद्देश्य हिंदी में हेगेल के मूल लेखों की गंभीर कमी को दूर करना है। एक समाचार पत्र के लिए लिखे गए निबंध के रूप में यह लेख हेगेल की कई केंद्रीय दार्शनिक अवधारणाओं को बेहद सरलता और सुगमता के साथ प्रस्तुत करता है। इसके कारण यह हेगेलीय चिंतन का एक उत्तम परिचय भी है। इस निबंध का मुख्य केंद्र “अमूर्त विचार” की आलोचना है, जिससे हेगेल का आशय, सरल शब्दों में, एकांगी और अपचयी चिंतन से है। इस प्रक्रिया में हमें हेगेल के गहन विचारों और उनके व्यापक दार्शनिक क्षितिज की एक सघन झलक प्राप्त होती है, जिसमें तर्कशास्त्र, तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, नैतिकता, समाज, राजनीति, साहित्य आदि अनेक क्षेत्र सम्मिलित हैं।
References
Diderot, Denis. Jacques le fataliste et son maître. Présenté par Jean Dutourd. Paris: Éditions Gallimard et Librairie Générale Française, 1961.
Goethe, Johann Wolfgang von Die Leiden des jungen Werthers. Edited by E. L. Stahl. Oxford: Basil Blackwell, 1944.
Hegel, G. W. F.. Hegel: Texts and Commentary. Translated and edited by Walter Kaufmann. Garden City, NY: Doubleday Anchor Books, 1966.
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